मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में ipc 2nd unit e 1st
मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय
<
धारा 299 आपराधिक मानव वध
जो कोई मृत्यु का हित करने के आशय से या ऐसी शारीरिक क्षति कार्य करने के आशय है जिससे मृत्यु का , हित हो जाना संभव हुए हो या ज्ञान रखते हुए किया संभव है कि वह उस कार्य से मृत्यु का राज कर दे कोई कार्य करके मैं तो काट कर देता है वह आपराधिक मानव वध का अपराध करता है
दृष्टांत
क एक गढ्ढे पर लकड़ियां और घास इस आसय से बिछाता है कि तद् द्वरा मृत्यु कारित करें या यह ज्ञान रखते हुए बिछाता है कि संभव है कि तद् द्वारा मृत्यु हो य यह विश्वास करते हुए कि वह भूमि सही है उस पर चलता है उसमें गिर पड़ता है और मारा जाता है आपराधिक मानव वध का अपराध किया
सदोष मानव या हत्या
अभियुक्त लाठी से लैस होकर मृतक के खेत में प्रवेश किया मृतक को गालियां दिया उसके बाद बिना किसी उत्तेजना के लाठियों से हमला किया उसे रोकने के प्रयासों के बावजूद अभियुक्त द्वारा हमला तब तक जारी रखा गया जब तक मृतक गिरकर मर नहीं गया अभियुक्त के ऐसे व्यवहार से मृत्यु कार्य करने का आशय प्रकट होता है अतः अभियुक्त हत्या के लिए दोष सिद्ध किए जाने हेतु दायी है ना कि अंतर्गत धारा 304 भाग सेकंड दयाल सिंह बनाम उत्तरांचल राज्य air2020 sc 3046
सदोष मानव वध एवं उपेछा द्वारा मृत्यु में अंतर
सदोष मानव वध को प्रथम खंड में मृत्यु करने वाले कार्य के रूप में परिभाषित करती है दूसरा उपखंड ज्ञान के अलग आशय को निर्देशित करता है और तीसरा उपखंड आशय से अलग ज्ञान को निर्देशित करता है
धारा 304 का एक विशिष्ट करती है जहां उत्तेजना पुण्य कार्य से मृत्यु की जाती है जो धारा 299 के अंतर्गत हत्या नहीं होने वाला सदोष मानव वध नहीं है धारा 304 क के लागू होने के लिये अपेक्षायें सन्तुष्ट होनी चाहिये-
1 मृत्यु अवश्य ही अभियुक्त द्वारा कारित होना चाहिए
2 मृत्यु उत्तेजनापू्र्ण या उपेक्षा पूर्ण कार्य से होना चाहिए
धारा 300 हत्या ==> ऐतस्मिन् पश्चात अपवादित अप्पू आदि दशाओं को छोड़कर अपराधिक मानव वध हत्या है यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृतक आश्रित की गई हो मृत्यु कार्य करने के आशय से किया गया हो अथवा दूसरा यदि ऐसी शारीरिक शिकायत करने के आशय से किया गया हो जिससे अपराधी जानता हो कि उस व्यक्ति की मृत्यु कार्य करना संभव है जिसको आप हानिकारक की गई हो अथवा तीसरा यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक क्षति कार्य करने के आशय से किया गया हो और वह शारीरिक क्षति जिसके कार्य करने का आशय हो प्रकृति के मामूली अनुक्रम में मृतक आश्रित करने के लिए पर्याप्त हो अथवा चौथा यदि कार्य करने वाला यह जानता हूं कि वह कार्य आसन्न संकट है की पूरी संभावना है कि व मृत्यु कर ही देगा या ऐसी
जो कोई मृत्यु का हित करने के आशय से या ऐसी शारीरिक क्षति कार्य करने के आशय है जिससे मृत्यु का , हित हो जाना संभव हुए हो या ज्ञान रखते हुए किया संभव है कि वह उस कार्य से मृत्यु का राज कर दे कोई कार्य करके मैं तो काट कर देता है वह आपराधिक मानव वध का अपराध करता है
दृष्टांत
क एक गढ्ढे पर लकड़ियां और घास इस आसय से बिछाता है कि तद् द्वरा मृत्यु कारित करें या यह ज्ञान रखते हुए बिछाता है कि संभव है कि तद् द्वारा मृत्यु हो य यह विश्वास करते हुए कि वह भूमि सही है उस पर चलता है उसमें गिर पड़ता है और मारा जाता है आपराधिक मानव वध का अपराध किया
सदोष मानव या हत्या
अभियुक्त लाठी से लैस होकर मृतक के खेत में प्रवेश किया मृतक को गालियां दिया उसके बाद बिना किसी उत्तेजना के लाठियों से हमला किया उसे रोकने के प्रयासों के बावजूद अभियुक्त द्वारा हमला तब तक जारी रखा गया जब तक मृतक गिरकर मर नहीं गया अभियुक्त के ऐसे व्यवहार से मृत्यु कार्य करने का आशय प्रकट होता है अतः अभियुक्त हत्या के लिए दोष सिद्ध किए जाने हेतु दायी है ना कि अंतर्गत धारा 304 भाग सेकंड दयाल सिंह बनाम उत्तरांचल राज्य air2020 sc 3046
सदोष मानव वध एवं उपेछा द्वारा मृत्यु में अंतर
सदोष मानव वध को प्रथम खंड में मृत्यु करने वाले कार्य के रूप में परिभाषित करती है दूसरा उपखंड ज्ञान के अलग आशय को निर्देशित करता है और तीसरा उपखंड आशय से अलग ज्ञान को निर्देशित करता है
धारा 304 का एक विशिष्ट करती है जहां उत्तेजना पुण्य कार्य से मृत्यु की जाती है जो धारा 299 के अंतर्गत हत्या नहीं होने वाला सदोष मानव वध नहीं है धारा 304 क के लागू होने के लिये अपेक्षायें सन्तुष्ट होनी चाहिये-
1 मृत्यु अवश्य ही अभियुक्त द्वारा कारित होना चाहिए
2 मृत्यु उत्तेजनापू्र्ण या उपेक्षा पूर्ण कार्य से होना चाहिए
3 उत्तेजना उपेक्षा पूर्ण कार्य सदोष मानव वध नहीं होना चाहिए
धारा 300 हत्या ==> ऐतस्मिन् पश्चात अपवादित अप्पू आदि दशाओं को छोड़कर अपराधिक मानव वध हत्या है यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृतक आश्रित की गई हो मृत्यु कार्य करने के आशय से किया गया हो अथवा दूसरा यदि ऐसी शारीरिक शिकायत करने के आशय से किया गया हो जिससे अपराधी जानता हो कि उस व्यक्ति की मृत्यु कार्य करना संभव है जिसको आप हानिकारक की गई हो अथवा तीसरा यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक क्षति कार्य करने के आशय से किया गया हो और वह शारीरिक क्षति जिसके कार्य करने का आशय हो प्रकृति के मामूली अनुक्रम में मृतक आश्रित करने के लिए पर्याप्त हो अथवा चौथा यदि कार्य करने वाला यह जानता हूं कि वह कार्य आसन्न संकट है की पूरी संभावना है कि व मृत्यु कर ही देगा या ऐसी
Comments
Post a Comment